स्वामी जी श्री 1008 श्री समर्थरामजी महाराज की आरती

आरती गुरू निरंजन देवा ।

सबही संत करे तहं सेवा ।।टेक।।

हिरदै सुध हो राम उचारे ।

एक अखंडित व्यापक सारे ।।1।।

ध्यान धुन घंटा सु बजावे ।

ज्ञान प्रकास अगम्म लिखावे ।।2।।

बुद्धि लीन भई चित्त संगा ।

बेद साधु गावे ज उतंगा ।।3।।

आतम ब्रह्म सौ एक बिलासा ।

अज्ञान बंध छूटे जग पासा ।।4।।

आनंद अवधी केला करि है ।

समर्थराम यह आरती धरि है ।।5।।