स्वामी जी श्री 1008 श्री रामसेवग जी महाराज (बड़ा) की आरती

आरती सत चित्त राम मुरारी ।

शरणागत तुम लेहू उबारी ।।टेक।।

प्रथम आरती ब्रह्मा गावे ।

शिव सनकादिक पार न पावे ।।1।।

दूसरी आरती शेष उचारे ।

उभय सहंस रसना नहिं टारे ।।2।।

तृतीये ध्रुव प्रहलाद सुकदेवा ।

इंद्र वरूण पद लागे सेवा ।।3।।

अनंत संत जन आरती कर हैं ।

रामसेवग भवसागर तिरहै ।।4।।