स्वामी जी श्री 1008 श्री रामसेवकजी महाराज (छोटा) की आरती

आरती राम सिरोमणि देवा ।

तन मन अर्प करूं जन सेवा ।।टेक।।

राम सिरोमणि सब का स्वामी ।

व्यापक सारे अन्तर्यामी ।।1।।

उत्तम आस थाल तन भारी ।

जामें सूंज सम्पूरण सारी ।।2।।

भोजन भाव ध्यान की धूपा ।

प्रीति का पुहुप चढ़ाय अनूपा ।।3।।

सील सिंगार सूंज मन लीजे ।

ज्ञान दीप ले आरती कीजे ।।4।।

सतगुरूजी ए भेद बताया ।

जाते राम निकट ही पाया ।।5।।

रामसेवक ए आरती गावे ।

ए आरती सूं निजपद पावे ।।6।।