स्वामी जी श्री 1008 श्री भाऊदासजी महाराज की आरती

आरती रामचरण सुखकारी ।

जन्म मरण भव दुःख निवारी ।।टेक।।

ये आरती सनकादिक गावे ।

गर्भवास में वे नहिं आवे ।।1।।

संकर सेष पार नहिं पावे ।

नारद निसिवासर गुण गावे ।।2।।

सुकदेव ध्रू प्रहलाद ऊचारी ।

अनंतकोटि जन गया जु पारी ।।3।।

आदि अंत जाको नहिं आवे ।

राम रट्याँ घट माँही पावे ।।4।।

सतगुरू रामचरण उर माँही ।

भाऊदास यह आरती गाही ।।5।।