स्वामी जी श्री 1008 श्री फकीरदासजी महाराज की आरती

आरती अमर अमुरत तेरी ।

सब सुरत से भयोन बसेरी ।।टेक।।

ज्यु जल चंद्र बसे जल माहि ।

दिसत है पण न्यारा नाहि ।| 1।

ऐसे राम रहे भरपूरा ।

सब घट व्यापक सबसे दूरा ।।2।।

ज्युं आकाश अलिप्त सो होई ।

सब बरते उर माहि समाई ।।3।।

गाजे बिज पवन संभरणा ।

अनेक रूप माया से करना ।।4।।

सब आधार ब्रह्म से होई ।

ब्रह्म सदा अलिप्त रहे होई ।।5।।