स्वामी जी श्री 1008 श्री देवादास जी महाराज की आरती

आरती राम नाम की कीजै ।

निसिदिन नाम उसी का लीजै ।।टेक।।

राम नाम की आरती सार ।

सुरति निरती का दिवला संवार ।।1।।

करणी कुम्भ बोध जल होई ।

राम नाम की सेज संजोई ।।2।।

चित्त को चंदन आदि उरलाई ।

राम नाम की कीरति गाई ।।3।।

प्रीति का पुष्प अर्प अनुसरिए ।

तत्व का तिलक सदा ही करिए ।।4।।

देवादास के आरती एही ।

राम नाम सूं नौतम नेही ।।5।।