स्वामी जी श्री 1008 श्री तुलसीदासजी महाराज की आरती

ऐसी आरती करो मन ज्ञानी ।

भर्म तजो गहो सारंग पानी ।।टेक।।

परथम आरती रसना लीजे ।

राम-राम रट अमृत पीजे ।।1।।

दूसरी आरती हिरदै करिए ।

ध्यान अखंडित निश्चल धरिये ।।2।।

तीसरी आरती नाभि उतारो ।

रोंम ही रोंम होत झुणकारो ।।3।।

चौथी आरती गिगन चढ़ावो ।

परस त्रिकूटी निज घर जावो ।।4।।

परम ज्योति जहं अनहद तूरा ।

मानूं अन्तक ऊग्या सूरा ।।5।।

सतगुरूजी सूंइण बिधि पाई ।

तुलसीदास यह आरती गाई ।।6।।