स्वामी जी श्री 1008 श्री जीवणदासजी महाराज की आरती

आरती कीजे राम अखंडा ।

रच्यों घाट बिनसर ब्रह्मंडा ।।टेक।।

अखिल ब्रह्म सब अन्तरयामी ।

अभै अनामी यह घण नामी ।।1।।

निगमागम कहुँ पार न पावे ।

बुधि सम सेष सारदा गावे ।।2।।

सिव और सनक सनन्दन ध्यावे ।

सनत्कुमार सनातन चावे ।।3।।

ज्ञानमयी दीपक कर लीजे ।

जन जीवण हरि चित दीजे ।।4।।