महाप्रभु स्वामी रामचरण जी महाराज आरती

आरती अचल पुरूष अविनाशी , राम-राम
घट घट व्यापक सकल प्रकाशी ।।
प्रथम आरती मन्दिर बुहारिया , 
राम राम रट करम निवारिया ।।1।।
दूसरी आरती दीपक जोया ,
 ह्रदय प्रेम चांदणा होया ।।2।।
तीसरी आरती कुम्भ भराया ,
 नाभि कमल से गगन चढाया ।।3।।
चौथी आरती चौक बिराजे ,
 जहां अनहद का बाजा बाजे ।।4।।
पांचवी आरती पूरण कामा , 
सुरति परसिया केवल रामा ।।5।।
सेवक स्वामी भया है समाना , 
राम ही राम और नहीं आना ।।6।।
रामचरण एैसी आरती कीजै , 
परस अमर वर जुग जुग जीजै ।।7।।